समय का सदुपयोग
पर्युषण महापर्व – कर्तव्य पॉंचवॉं
कर्तव्य पॉंचवॉं – चैत्यपरिपाटी
जब अन्य जीव अपना अस्तित्व बनाएँ रखने के लिए प्रयत्नशील हैं, तब मनुष्य अपने व्यक्तित्व को खिलाने-विकसित करने एवं सहेजने-संवरने के लिए दौड़ रहा है| सचमुच तो परमात्मारूप करुणासागरमें गंगाकी तरह घुलकर अस्तित्व और व्यक्तित्व दोनों को विलीन कर देना है| Continue reading “पर्युषण महापर्व – कर्तव्य पॉंचवॉं” »
कमलश्री कुत्ती, बंदरी बनी

शिवभूति और वसुभूति दो भाई थे| शिवभूति की स्त्री कमलश्री अपने देवर वसुभूति के प्रति राग वाली बनी और उसने मोहवश अनुचित याचना की| भाभी के ऐसे अनुचित वचनों को सुनकर वसुभूति विचार करने लगा कि-‘‘ओह ! धिक्कार हो कामवासना को, जो ऐसी अनुचित याचना करवाती है| मुझे तो, किसी भी हालत में कामाधीन नहीं होना है|’’ इस प्रकार वैराग्य उत्पन्न होने पर उसने दीक्षा ग्रहण कर ली| यह बात कमलश्री तक पहुँची| राग के उदय से आर्तध्यान में रहती हुई वह मानसिक और वाचिक पाप की आलोचना लिए बिना ही शुनी (कुत्ती) के रूप में उत्पन्न हुई| Continue reading “कमलश्री कुत्ती, बंदरी बनी” »
ज्ञान की रोशनी
अंजनासुन्दरी

एक राजा की दो पत्नियॉं थी| लक्ष्मीवती और कनकोदरी| लक्ष्मीवती रानी ने अरिहंत-परमात्मा की रत्नजड़ित मूर्त्ति बनवाकर अपने गृहचैत्य में उसकी स्थापना की| वह उसकी पूजा-भक्ति में सदा तल्लीन रहने लगी| उसकी भक्ति की सर्वत्र प्रशंसा होने लगी| ‘‘धन्य है रानी लक्ष्मीवती को, दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय|’’ यह रानी तो सुख में भी प्रभु सुमिरन करती हैंै, धन्य है !!’ Continue reading “अंजनासुन्दरी” »
प्रायश्चित की ताकत

केन्सर की गॉंठ हो, फिर भी ऑपरेशन कीया जाए, तो मरीज़ अच्छा हो जाता है| परंतु जो एक छोटा-सा भी कॉंटा पॉंव में रह जाये, तो इंसान को मार डालता हैं| इसी प्रकार बड़े-बड़े पाप जीवन में हो गये हो, तो भी प्रायश्चित-आलोचना के प्रताप से जीव धवल हंस के पंख की तरह निर्मल बन सकता है| Continue reading “प्रायश्चित की ताकत” »
जीवन का निर्माण

जन्म का प्रारम्भ तो सभी का एक जैसा होता है लेकिन अन्त एक जैसा नहीं होता| सुबह तो सभी की एक सी है पर शाम भिन्न-भिन्न है| Continue reading “जीवन का निर्माण” »
अपरिग्रह
जीव विचार – गाथा 7
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सब कुछ तुम्हारी पात्रता पर निर्भर है

अगर तुम्हारा पात्र भीतर से बिलकुल शुद्ध है, निर्मल है, निर्दोष है, तो जहर भी तुम्हारे पात्र में जाकर निर्मल और निर्दोष हो जाएगा| Continue reading “सब कुछ तुम्हारी पात्रता पर निर्भर है” »












