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लाइफ स्टाइलSorry, this article is only available in English. Please, check back soon. Alternatively you can subscribe at the bottom of the page to recieve updates whenever we add a hindi version of this article.
कर्तव्य चौथा – अट्ठमतप
सम्यक्त्वी की विधिपूर्वक की नवकारशी जितने तपसे नरकमें दुःख सहन करने में कारणभूत १०० सालके पापकर्मों का नाश हो जाता है| इस मार्ग पर यदि आगे बढ़े तो पोरिसी से १००० साल… एकासणासे १० लाख साल, उपवाससे १० हज़ार करोड वर्ष, छट्ठ से १ लाख करोड़ वर्ष और अट्ठमसे १० लाख करोड़ वर्ष के पाप नष्ट होते हैं| दो इँच की जीभ के रस को पुष्ट करने के लिए अनादिकाल से अभक्ष्य भोजनादि करके किये हुए पाप का प्रायश्चित अट्ठम तप है, जो आहारसंज्ञा को तोडने में भी सुरंग समान है| यह तप नामके अग्नि से एक ही झटकेमें कर्मोके हजारो टन कचरे का निकाल होता है| विशिष्ट तपके प्रभावसे ही नंदिषेण मुनि आदि की तरह ढ़ेर सारी लब्धि प्राप्त होती हैं| Continue reading “पर्युषण महापर्व – कर्तव्य चौथा” »

ऋषभदेव भगवान के पास भरत चक्रवर्ती के पुत्र मरीचि ने दीक्षा ग्रहण की| बाद में दुःख सहन करने में कमजोर बनने से उसने त्रिदंडिक वेश धारण किया| इस प्रकार वह चारित्र का त्याग करके देशविरति का पालन करने लगा| अल्प जल से स्नान करना, विलेपन करना, खड़ाऊँ पहनना, छत्र रखना वगैरह क्रिया करने लगा| एक बार भरत महाराजा ने समवसरण में भगवान ऋषभदेव से पूछा- हे प्रभु ! आज कोई ऐसा जीव है, जो भविष्य में तीर्थंकर बनेगा? तब भगवान ने कहा कि ‘‘हे भरत ! तेरा पुत्र मरीचि इस भरत क्षेत्र में प्रथम वासुदेव, महाविदेह में चक्रवर्ती और भरत क्षेत्र में अंतिम तीर्थंकर बनेगा|’’ Continue reading “मरीचि का अहंकार और उत्सूत्र” »
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हमे इस जीव हिंसा के पाप से बचना होगा| Continue reading “जियो और जीने दो” »
करनी ऐसी कीजिए जिसे न जाने कोय|
जैसे मेहंदी पात में बैठी रंग छुपाय॥
काम करना आपका काम है…..बस सिर्फ काम करें…..नाम नहीं चाहें…..धर्म करना आपकी आत्मा का स्वभाव है, तो सम्मान की इच्छा मत करो|

रज्जा साध्वी ने सचित्त पानी पीया
रज्जा साध्वीजी को कोढ़ रोग हो गया था| एक साध्वीजी ने उससे पूछा कि यह रोग आपको कैसे हुआ? तब उसने कहा कि अचित्त (उबाला हुआ) पानी पीने से गर्मी के कारण यह रोग हुआ है| Continue reading “मुरझाये फूल जिन्होंने आलोचना नहीं ली” »