
कामेसु गिद्धा निचयं करेन्ति
कामभोगों में आसक्त रहनेवाले व्यक्ति कर्मों का बन्धन करते हैं
पॉंच इन्द्रियों में से चक्षुइन्द्रिय और श्रोत्रेन्द्रिय अर्थात् आँख और कान के विषय ‘काम’ कहलाते हैं – जैसे सुन्दर चित्र, नाटक, सिनेमा, मनोहर दृश्य, नृत्य आदि आँख के विषय हैं और श्रृङ्गाररस की कथाएँ या कविताएँ, फिल्मी गाने, विविध वाद्य, अपनी प्रशंसा, स्त्रियों या पुरुषों का मधुरस्वर, (स्त्रियों के लिए पुरुषों की और पुरुषों के लिए स्त्रियों की मीठी-मीठी बातें) आदि चक्षु एवं कान के विषय हैं|
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