1 0 Archive | आचारांग सूत्र RSS feed for this section
post icon

लोभ को छोड़िये

लोभ को छोड़िये

लोभमलोभेण दुगंछमाणे
लद्धे कामे नाभिगाहइ

लोभ को अलोभ से तिरस्कृत करनेवाला साधक प्राप्त कामों का भी सेवन नहीं करता

लोभ एक कषाय है| वह क्रोध, अभिमान और माया की तरह आत्मा को कलुषित करता है – उसकी साधना में बाधक बनता है| जैसे अन्य कषाय आत्म-शुद्धि के लिए त्याज्य हैं, वैसे ही लोभ भी त्याज्य है| Continue reading “लोभ को छोड़िये” »

Leave a Comment
post icon

सत्य में धैर्य

सत्य में धैर्य

सच्चम्मि धिइं कुव्वह

सत्य में धृति करो-स्थिर रहो

सत्य क्या है? यह जानने के लिए सत्पुरुषों की जीवनी देखनी चाहिये| उनका चाहे जैसा आचरण रहा हो, हमारे लिए भी वही आचरणीय है| सत्पुरुषों का मार्ग ही सन्मार्ग है और सन्मार्ग पर चलनेवाले ही सत्पुरुष हैं| सत्पुरुषों के आचरण को सदाचार कहते हैं| Continue reading “सत्य में धैर्य” »

Leave a Comment
Page 6 of 6« First...23456