लोभ को अलोभ से तिरस्कृत करनेवाला साधक प्राप्त कामों का भी सेवन नहीं करता
लोभ एक कषाय है| वह क्रोध, अभिमान और माया की तरह आत्मा को कलुषित करता है – उसकी साधना में बाधक बनता है| जैसे अन्य कषाय आत्म-शुद्धि के लिए त्याज्य हैं, वैसे ही लोभ भी त्याज्य है| Continue reading “लोभ को छोड़िये” »
सत्य क्या है? यह जानने के लिए सत्पुरुषों की जीवनी देखनी चाहिये| उनका चाहे जैसा आचरण रहा हो, हमारे लिए भी वही आचरणीय है| सत्पुरुषों का मार्ग ही सन्मार्ग है और सन्मार्ग पर चलनेवाले ही सत्पुरुष हैं| सत्पुरुषों के आचरण को सदाचार कहते हैं| Continue reading “सत्य में धैर्य” »