1 0 Archive | जैन स्तवन RSS feed for this section
post icon

एक मुज विनती निसुणोज़

Listen to एक मुज विनती निसुणोज़

श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिन स्तवन

मुनिसुव्रत जिनराय,
एक मुज विनती निसुणोज़
आतमतत्त्व क्युं जाणुं जगद्गुरु,
एह विचार मुज कहीयो;
आतमतत्त्व जाण्या विण निरमल,
चित्तसमाधि नवि लहियो

…कुं.१

Read the lyrics

Leave a Comment
post icon

धर्म जिनेसर गाउं रंगशुं

Listen to धर्म जिनेसर गाउं रंगशुं

श्री धर्मनाथ जिन स्तवन

धर्म जिनेसर गाउं रंगशुं,
भंग न पडशो हो प्रीत जिनेश्वर;
दुजो मन मंदिर आणुं नहीं,
ए अम कुळवट रीत.

…जि. ध..१

Read the lyrics

Leave a Comment
post icon

में कीनो नहीं तुम बीन और शुं

Listen to में कीनो नहीं तुम बीन और शुं

श्री सुविधिनाथ जिन स्तवन
राग : भजोरी प्यारो नमिजीणंद.. (भीमपलाश)
Continue reading “में कीनो नहीं तुम बीन और शुं” »

Leave a Comment
post icon

सुविधि जिनेसर पाय नमीने

Listen to सुविधि जिनेसर पाय नमीने

श्री सुविधिनाथ जिन स्तवन
राग : केदारो – ‘‘एम धन्नो धणने परचावे रे…’’ ए देशी

सुविधि जिनेसर पाय नमीने, शुभ करणी एम कीजे रे;
अति घणो ऊलट अंग धरीने, प्रह ऊठी पूजीजे रे.

…सुविधि.१

Read the lyrics

Leave a Comment
post icon
post icon
post icon

मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!

Listen to मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!

श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : मनडुं किम हि न बाजे हो कुंथुजिन…
Continue reading “मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!” »

Leave a Comment
post icon

हो अविनाशी

Listen to हो अविनाशी

श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : सुण चंदाजी…
Continue reading “हो अविनाशी” »

Leave a Comment
post icon

अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए

Listen to अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए

श्री अभिनंदन जिन स्तवन
राग : धन्यासिरि-सिंधुओ – “आज निहेजो रे दीसे नाईलो रे…’’ ए देशी

अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए,
दरिसण दुरलभ देव;
मत मत भेदे रे जो जई पूछीए,
सहु थापे अहमेव.

…अभिनंदन.१

Read the lyrics

Leave a Comment
post icon

देखण दे रे, सखी!

Listen to देखण दे रे, सखी!

श्री चंद्रप्रभ जिन स्तवन
राग : केदारो तथा गोडी – ‘‘कुमारी रोवे, आक्रंद करे, मु कोई मुकावे…’’ ए देशी

देखण दे रे, सखी!
मुने देखण दे, चंद्रप्रभ मुखचंद,
उपशमरसनो कंद, सखी.
गत कलि-मल-दु:खदंद..

…सखी.१

Read the lyrics

Leave a Comment
Page 2 of 3123