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श्रीफल का महत्त्व

श्रीफल का महत्त्व

श्रीफल रखुं मैं हाथ में, इसमें है पानी भरा
प्रिय जमाई आप रखना, मन को सदा गहरा भरा
गृहस्थ जीवन भी एक समस्या है| दो बर्तन हो वहॉं आपस में टकराने की संभावना रहती है, उसी प्रकार वरवधू की सौम्य प्रकृति के अभाव में परस्पर अनबन हो सकती है, किन्तु मनमुटाव नहीं| स्त्री की अपेक्षा पुरुष प्रधान है| उसका दिल बड़ा गंभीर और कोमल होता है|

श्रीफल यदि टूटे भी तो, मधुरता जाती नहीं
गिरी के स्वाद में कभी, कटुता आती नही
अत: वह अपने जीवन में अनबन को स्थान नहीं देता| यदि किसी कारणवश पति-पत्नी आपस में टकरा भी जाये फिर भी उनके व्यवहार और अन्तरंग स्नेह में अन्तर नहीं आता| जैसे कि श्रीफल के टुकड़े-टुकड़े होने पर भी उसकी मधुरता और स्वाद में कभी कटुता नहीं आती, इसी बात को प्रकट करने के लिए बींद को तोरण पर आते समय श्रीफल भेंट करती है|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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