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इच्छानिरोध

इच्छानिरोध

छंदं निरोहेण उवेइ मोक्खं

इच्छाओं को रोकने से ही मोक्ष प्राप्त होता है

इच्छाएँ अनन्त हैं| एक इच्छा को पूरी करें; तो दूसरी पैदा हो जाती है| फिर दूसरी के बाद तीसरी, तीसरी के बाद चौथी और चौथी के बाद पॉंचवी अर्थात् एक के बाद एक इच्छा उत्पन्न होती ही रहती है | प्राणी उसकी पूर्ति को लिए दौड़धूप करता ही रहता है और एक दिन अन्तिम सॉंस छोड देता है|

इस प्रकार इच्छाओं की पूर्ति के पीछे लग जाने पर जीवन-भर सच्चा सुख प्राप्त नहीं हो पाता| स्थायी सुख या वास्तविक सुख ही सच्चा सुख है; जो भीतर से प्राप्त होता है, बाहर से नहीं|

जो सुख बाहर से प्राप्त होता है, वह टिकाऊ नहीं होता – वास्तविक नहीं होता| मोक्ष का सुख ही सच्चा सुख है; जो इच्छापूर्ति से नहीं; किन्तु इच्छा-निरोध से प्राप्त होता है – संयम और तप से प्राप्त होता है|

मन पाँच इन्द्रियों के विषय जुटाना चाहता है और उनमें सुख की आशा रखता है; परन्तु वहाँ सुख नहीं सुखाभास होता है| मन को विषयों से हटाकर आत्मा या परमात्मा के ध्यान में लगाने से इच्छाओं का निरोध होगा और उसीसे मोक्ष प्राप्त होगा|

- उत्तराध्ययन सूत्र 4/8

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1 Comment

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  1. JashvantnShah
    मार्च 13, 2013 #

    Jai jinendra.I am sorry, I do not have facility to type in Hindi in my computer.So I have to type in English only. “Ichha” Desire is the root cause of all bondage i.e.Karma.So to get rid of the karmas, one must give up all sorts of desires. Acarya Umaswati in TatvarthaSutra mentions Ichha Nirodh iti Tapa .And Tapasa Nirjarasch. And if there are no desires no new Karma will be there. Nasti mulo kutha saakha .A person desires of having Sukh and that itself is the cause of Karma.

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