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मोक्ष और निर्वाण

मोक्ष और निर्वाण

अगुणिस्स नत्थि मोक्खो,
नत्थि अमोक्खस्स निव्वाणं

गुणोंके अभाव में मोक्ष नहीं होता और मोक्षके अभाव में निर्वाण नहीं होता

यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है; तो मानना चाहिये कि उसमें मानसिक विकृति है, सच्चरित्र का अभाव है|

अपराधी दण्डित होता है – राज्य से भी, समाज से भी और अपनी आत्मा से भी| इस दण्ड से बचने के लिए उसे अपराध से बचना होगा| मानसिक स्वास्थ्य ही अपराधों से मुक्त होने का उपाय है| मानसिक स्वास्थ्य का सम्बन्ध सच्चरित्र से है और सच्चरित्रका सम्बन्ध सद्गुणों से|

जिस व्यक्ति में सद्गुणों का अभाव है, उसे मोक्ष नहीं मिल सकता अर्थात् दुःखों से छुटकारा नहीं मिल सकता|

जिसे दुःखों से छुटकारा नहीं मिला; वह सदा चिन्ताग्रस्त रहेगा| अर्थात् दुश्चिन्ताओं से घिरा रहेगा उससे निर्वाण दूर रहेगा| निर्वाण अर्थात् परम आध्यात्मिक शान्ति पाने के लिए मोक्ष आवश्यक है| मोक्ष की प्राप्ति के लिए सद्गुणों को जीवन में स्थान देना आवश्यक है; क्यों कि अगुणी का मोक्ष नहीं होता और अमुक्त का निर्वाण नहीं होता|

- उत्तराध्ययन सूत्र 28/30

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2 Comments

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  1. Jashvant Shah
    मार्च 4, 2013 #

    Jai jinendra. Iwill be highly obliged, if you can make the difference between Moksha and Nirvan clear. Thanks.

  2. Jashvant Shah
    मार्च 5, 2013 #

    Jai jinendra. In continuation of my question regarding the difference between Liberation – Moksha and Freedom – Nirvan ,I feel here the difference cited in this sutra ( Uttara.Sutra 28/30 )is the difference between the two states of the Soul- Atma. One is Arihant or Kevali and the other is Siddha. Arihant or Kevali has totally stopped the influx of Karma,so there is no new bondage of Karma.That Soul is not going to accumulate new Karma.So there will be no new karma.Even though he has got rid of all the Ghatia Karmas,but has not got rid of Aghatia Karma.As per Karma theory of Jain Darshan,that soul is still left with 85 Karmaprakrity. When all these are got rid of,the Soul attains Nirvan or becomes Siddha.

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