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अनन्त इच्छा

अनन्त इच्छा

इच्छा हु आगाससमा अणंतया

इच्छा आकाश के समान अनन्त होती है

हम दुःखी क्यों हैं|

इसलिए कि हम कुछ चाहते हैं|

इसका अर्थ?

अर्थ यही कि इच्छा स्वयं दुःख है!

जब तक इच्छा है, दुःख है|

जिसमें भी इच्छा है, दुःखी है|

इच्छा का जन्म क्यों होता है ?

अपने भीतर अभाव की अनुभूति से|

इस अनुभूति का कारण?

आत्मा के वास्तविक स्वरूप का अज्ञान|

स्वरूप?…अनन्तानन्दमय !

जब तक आत्मा के इस वास्तविक स्वरूप का अज्ञान रहता है, व्यक्ति बाहर सुख की खोज में भटकता रहता है| इसके लिए वह विषयों की शरण में जाने का प्रयास करता है, जहॉं सुख नहीं, केवल सुख का आभास है, अस्थायी या अचिरस्थायी सुख है| फिर विषयों से मन तृप्त कहॉं होता है? एक इच्छा के बाद दूसरी और छोेटी इच्छा के बाद बड़ी उत्प होती ही रहती है| इच्छा की पूर्ति का प्रयास इसीलिए विफल रहता है|

उपर देखिये !

आकाश कैसा है ?

अनन्त है – न कहीं ओर है, न छोर !

इच्छा भी वैसी ही अनन्त है|

- उत्तराध्ययन सूत्र 6/48

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1 Comment

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  1. vinod jain
    जुलाई 29, 2013 #

    if we dont accept anything from others we will be happy.
    if we have more acceptance from others we will be always unhappy.
    this the law of life.

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