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भक्तामर स्तोत्र – एक दिव्य रचना

“भक्तामर स्तोत्र” भक्ति प्रधान स्तोत्र है, जैन काव्य परंपरा में इस स्तोत्र की अपनी महती महिमा और गरिमा हैं, स्वतंत्र पहचान है|

भक्तामर स्तोत्र का महत्व

अवंति के राजा हर्ष के दरबार में, मयूर तथा बाण नाम के दो महान विद्वान पंड़ितों नें राजा को अपनी-अपनी विद्वता के अनुरूप चमत्कारों के जरिए प्रभावित किया था। मयूर पंड़ित नें अपनी लड़की के शाप से हुये कोढ़ (कुष्ट) रोग के निवारण के लिए सूर्य-देवता की स्तुति की और छठ्ठे श्‍लोक की रचना करते वक्त सूर्य-देव ने प्रकट होकर वरदान दिया जिससे कुष्ट-रोग दूर हो गया। अपने ही ससुर मयूर पंड़ित का चमत्कार, पंड़ित बाण के लिए स्पर्धा का विषय बना। राजा के पास बाण पंड़ित नें प्रतिज्ञा की कि मैं चंड़िका-देवी की उपासना कर चमत्कार करूंगा। बाण पंड़ित नें अपने दोनो हाथ एवं पैर कटवा दिए एवं स्तोत्र के प्रभाव से हाथ व पैर जैसे थे वैसे ही हो गए। राजा इस चमत्कार से अति-प्रसन्न हुए| उसके बाद राजा के दरबार में सभी लोग दोनों पंडितो और उनके धर्म को पूजने लगे| एक बार दरबार में दूसरे धर्मो की चर्चा हो रही थी और कहा जा रहा था की बाकी सारे धर्म निरर्थक है| तब कितने ही पंड़ितों ने राजा से कहा कि जैनों के अन्दर ऐसे मंत्रो का अद्वितीय-प्रभाव नहीं हैं। तभी राजा के प्रधान ने राजा से कहा कि जैनाचार्य पू. मानतुंग सुरीश्वरजी इस समय हमारे राज्य में विराजित हैं और वह बड़े ही विद्वान साधु हैं|

यह सुनकर राजा ने पू. मानतुंग सुरीश्वरजी को बुलावा भेज कर कहा कि आप भी आप के भगवान व जैन-धर्म का चमत्कार दिखाइए| पूज्य आचार्य मानतुंग सुरीश्वरजी महाराज ने कहा कि जैन साधु मोक्ष प्राप्ति की इच्छा रखते हैं और वे किसी भी जीव को यन्त्र/तंत्र से दुःख नहीं पहुचाते| फिर भी अगर राजा जोर देते हैं वह उसे भक्ति की शक्ति दिखा सकते हैं| ऐसा कह कर आचार्यश्रीने स्वयं को 44 बेड़ीयों से बंधवा कर एक कालकोठरी में भारी तालो के साथ बंद करवा दिया तथा “भक्तामर” नाम के नूतन-काव्य की रचना की। वे एक-एक श्लोक बोलते गये और श्लोक के आश्चर्यजनक प्रभाव से एक-एक कर 44 बेड़ीयॉं स्वतः ही तुटती गई और कालकोठरी के ताले भी स्वतः टूट गए|

यह घटना को देख के राजा आश्चर्य चकित रह गए और जैन धर्म से प्रभावित होके पू. मानतुंग सुरीश्वरजी और भगवान श्री आदिनाथ के परम भक्त बने|

प्रस्तुत भक्तामर स्तोत्र की रचना “वसंततिलका छंद” में की गयी हैं| इस स्तोत्र की महिमा वक्त के साथ बढ़ती ही गयी|

सर्व सामान्य धारणा के अनुसार भक्तामर के कुछ प्रमुख श्लोक विशिष्ट प्रयोजनों में बड़े चमत्कारी सिद्ध होते हैं जैसे :-

1. लक्ष्मी प्राप्ति के लिए – २ एवं ३६वा श्लोक
2. विद्या प्राप्ति के लिए – ६वा श्लोक
3. वचन सिद्धि के लिए – १०वा श्लोक
4. उपद्रव शांति के लिए – ७वा श्लोक
5. रोग, पीड़ा निवारण के लिए – १७वा श्लोक
6. र्प आदि विष निवारण के लिए – ४१वा श्लोक
7. दूसरों के द्वारा किये गए जादू , टोटका आदि से आत्म-रक्षण करने के लिए – ९वा श्लोक
8. आवश्यकता पूर्ति के लिए – १९वा श्लोक


संदर्भ
1. जैन परंपरा नो इतिहास – दर्शन विजयजी, ज्ञान विजयजी अने चरित्र विजयजी


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2 Comments

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  1. piyush jain
    जुलाई 13, 2012 #

    what about the rest of the mantrs with Yantras and shloks of Bhaktamar stotra??? there are only first six shloks with mantras and yantras!!!

    Please upload all 48 .

  2. Mohan
    अप्रेल 25, 2014 #

    Jai jenadra

    I have seen that when you read Bhakamar stotra you will get the postive energy and it is so powerful mantra that difficulties will be solved easly and you get refreshed and peace of mind.

    IT IS A GREAT BHAKTAMAR STOTRA WRITTEN BY SRI MANATHUGA ACARYA PRAISING SRI ADINATH BHAGAVAN

    Mohan

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