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तुम दरिशन भले पायो

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श्री ऋषभदेव जिन स्तवन
राग : परदीप

तुम दरिशन भले पायो,
प्रथम जिन! तुम दरिशन भले पायो;
नाभि नरेसर नंदन निरूपम,
माता मरूदेवी जायो.

…प्रथम. १

आज अमीरस जलधर वूठो,
मानुं गंगाजले नाह्यो;
सुरतरू सुरमणि प्रमुख अनुपम,
ते सवि आज में पायो.

…प्रथम. २

युगला धर्म निवारण तारण,
जग जस मंडप छायो;
प्रभु तुज शासनवासन समकित,
अंतर वैरी हटायो.

…प्रथम. ३

कुदेव कुगुरू कुधर्मनी वासे,
मिथ्यामतमें ङ्गसायो;
में प्रभु आजसे निश्चिय कीनो,
सवि मिथ्यात्व गवायो.

…प्रथम. ४

बेर बेर करुं बिनती इतनी,
तुम सेवारस पायो;
ज्ञानविमल प्रभु साहिब नजरे,
समकित पूरण सवायो.

…प्रथम. ५

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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1 Comment

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  1. kunali shah
    अगस्त 22, 2012 #

    its excellent thank you for your efforts.

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