कहेइ अत्तणो वाहि|
एवं जाणगस्स वि सल्लुद्धरणं परसगासे॥

पानी स्वयं अप्काय जीवों का शरीर है| यह अप्काय जीव एकेन्द्रिय है तथा अनगल (बिना छाने) पानी में चलते-फिरते सूक्ष्म त्रस जीव भी बहुत होते है| पोरा वगैरेह बेइन्द्रिय जीव पानी में होते हैं| Continue reading “पानी के त्रस जीवों को जानें-पहचानें” »
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रात में भोजन, पानी आदि ग्रहण करना जैन धर्म में निषेध हैं| इस निषेध के कई कारण हैं| कीटाणु और रोगाणु जिनको नग्न आंखों से देखना असंभव हैं, वे सूरज की रौशनी में गायब हो जाते हैं, वास्तव में नष्ट नहीं होते; वे छायादार स्थानों में शरण लेते हैं और सूर्यास्त के बाद; वे वातावरण में प्रवेश कर उसे व्याप्त करते हैं और फिर हमारे भोजन में मिल जाते हैं| इस तरह का भोजन उपभोग करने से कीटाणुओं और जीवाणुओ की हत्या होती हैं और बारी में हमारे बीमार स्वास्थ्य का कारण बनते हैं|
Continue reading “रात्रिभोजन न करने के वैज्ञानिक कारण” »

जीवों की उत्पत्ति होने के बाद उन जीवों की रक्षा करना बहुत मुश्किल हो जाता है| इसलिए घर में जीवों की उत्पत्ति ही न हो इस बात की सावधानी रखना उत्तम कार्य है|
इतनी सावधानी अवश्य रखिए :-
1) घर को सम्पूर्णतया स्वच्छ रखिए – गंदगी से जीवोत्पत्ति विशेष होती है|
2) पानी का उपयोग कम से कम कीजिए, गीलेपन से अधिक मात्रा में जीव पैदा होते हैं|
3) खाद्य पदार्थ जमीन पर न गिरें, अन्न के आकर्षण से अनेक जीव दौडे चले आते हैं| Continue reading “उपचार से भली सावधानी” »

बासी खाद्य पदार्थ आदि पर सफेद रंग की फुग दिखाई देती है| यह खास करके बारिश में विशेष होती है| मिठाई, खाखरा, पापड, वडी, अन्य खाद्य पदार्थ, दवाई की गोलियॉं, साबुन पर, चमड़े के पाकिट-पट्टे पर, पुस्तक के पुठ्ठे पर तथा अन्य वस्तु पर नमी के कारण रातोरात सफेद फुग जम जाती है| Continue reading “फफूंदी/फूलन को पहचानो” »

निम्नलिखित विशेष सावधानियॉं बरतें :-
1. पानी का उपयोग कम से कम कीजिए, उसका घी के समान संभल-संभल कर उपयोग कीजिए|
2. स्नान, कपड़े धोने में, बाथरूम में, शौचालय में भी पानी को छानकर उपयोग में लाएँ|
3. नल को अनावश्यक खुला न छोडें|
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1. जो जगह अधिक समय तक गीली रहती हो, वहॉं निगोद की उत्पत्ति होती है| बाथरुम भी यदि सारा दिन गीला रहे तो उसमें भी निगोद की उत्पत्ति होती है| इसलिये घर का कोई भी स्थान अधिक समय तक भीगा न रहे इसकी सावधानी रखें| Continue reading “निगोद की रक्षा करें” »

अपना दोष देखना अच्छा है और दूसरों के गुण देखना अच्छा है; किन्तु लोग इससे उल्टी बात करते हैं| वे अपने तो गुण ही गुण देखते हैं और दूसरों के दोष देखते हैं| इस प्रकार अपने गुणों पर नजर रखकर वे अभिमानी बन जाते हैं और दूसरों के दोषों पर नजर रखकर वे उनसे घृणा करने लगते हैं| Continue reading “विवाद का मूल” »