लाइफ स्टाइलकषाय-निग्रह
पीछे नहीं…आगे देखिए

अतीत का महत्त्व है इससे इन्कार नहीं है| उसे यूँ ही भुलाकर नहीं रहा जा सकता… परन्तु कदम-कदम पर अतीत की दुहाई देना… उसी से चिपटे रहना स्वयं को खतरे में डालना है| अतीत की स्मृति भले ही रहे परन्तु दृष्टि तो भविष्य की ओर केन्द्रित रहनी चाहिए…| हम क्या थे इसकी अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण यह देखना है कि अब हमें क्या बनना है?
समय के साथ आगे चलना और देखना जरूरी है| पिछले समय से तो मात्र शिक्षा लेनी चाहिए… यदि मनुष्य का पीछे की ओर देखना जरूरी होता तो आँखें आगे की बजाय पीछे होती| कहा जाता है कि भूत के पैर पीछे की ओर उलटे होते हैं… अतः इस बात को याद रखकर आगे बढ़ना|
यह मेरा नहीं है…
यह घर मेरा नहीं है|
संसार की कोई भी जड़ चेतन वस्तु मेरी नहीं है|
क्या है तेरा ? Continue reading “यह मेरा नहीं है…” »
भले की हो भावना
पुरुषार्थ ही सफलता की कुंजी
प्रशंसा हो या निंदा, सत्कर्म करते रहो
यह पुण्य से मिला है
उत्तम मां-बाप पुण्य से मिले हैं|
मानव का देह पुण्य से मिला है| Continue reading “यह पुण्य से मिला है” »
मेरा सिद्धान्त
दुःख पाप से मिलता है| Continue reading “मेरा सिद्धान्त” »
साहसी बालक
डिट्टा का भाग्य

एक गॉंव में एक आदमी रहता था| उसे लोग डिट्टा कहकर बुलाते थे| वह कुछ भी पढ़ा लिखा नहीं था, इसलिए बेकार था| Continue reading “डिट्टा का भाग्य” »















