
जैसे पर्युषण के पॉंच कर्तव्यों का पालन करना है, ठीक उसी तरह सालभर के ग्यारह कर्तव्य का भी यथाशक्ति पालन अवश्य करना चाहिए|
पइवरिसं संघच्चण साहम्मिअभत्ति
तह य जत्ततिगं|
जिणगिहण्हवणं जिणधणवुड्ढि
महपूअ (धम्म) जागरिआ॥
सुअपूआ उज्जवणं तहेव तित्थपभावणा सोही॥
तह य जत्ततिगं|
जिणगिहण्हवणं जिणधणवुड्ढि
महपूअ (धम्म) जागरिआ॥
सुअपूआ उज्जवणं तहेव तित्थपभावणा सोही॥
सालभर में (१) संघपूजा (२) साधर्मिक भक्ति (३) यात्रात्रिक (४) स्नात्रपूजा (५) देवद्रव्यवृद्धि (६) महापूजा (७) धर्मजागरण (८) श्रुतपूजा (९) उद्यापन (१०) तीर्थप्रभावना और (११) प्रायश्चित्त….. ऐसे ग्यारह कर्तव्यों का पालन करना चाहिए| Continue reading “संघपूजा – साल का पहला कर्तव्य” »








