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तेउकाय की जयणा

तेउकाय की जयणा
प्रत्येक प्रकार की अग्नि में एकेंद्रिय जीव होते हैं, उन्हें अग्निकाय कहते हैं| विद्युत भी अग्निकाय है| अग्नि के एक तिनके में असंख्य अग्निकाय जीव होते हैं| Continue reading “तेउकाय की जयणा” »

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जयणा हमारी माता

जयणा हमारी माता
अष्टप्रवचन माता यदि साधु की माता है, तो जयणा श्रावक की माता है| जयणा याने जीवरक्षा के प्रति सावधानी|

हमारे चारों तरफ विशाल जीवसृष्टि बिखरी हुई है| आँगन में बिल्लीयॉं हैं तो, गलियों में कुत्ते फिरते हैं| रसोई घर में झिंगुर है तो, शयनकक्ष में खटमल हैं| बिलो में चूहे रहते हैं तो, कहीं चींटियों के दर हैं| बालों में जूं है, छत व दिवारों पर पक्षियों के घोंसले है तो कहीं मकड़ी के जाले हैं| फर्नीचर व दीवार पर दीमक फैली हुई है| चारों तरफ मच्छर उड़ रहे हैं| नल में से आ रहे पानी में असंख्य त्रस जीव हैं| अनाज मे लट वगैरह है, तो साग-सब्जी में भी कई जीव, लट वगैरह मिलते हैं| Continue reading “जयणा हमारी माता” »

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निगोद को पहचानें

निगोद को पहचानें
(चार्तुास) वर्षा ऋतु में घर के कम्पाऊंड में, पुरानी दीवारों पर अथवा मकान की छत (अगासी) पर हरी, काली, कत्थई आदि रंगों की काई (सेवाल-लील) जम जाती है| उसी को निगोद कहते हैं| Continue reading “निगोद को पहचानें” »

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पृथ्वीकाय की जयणा

पृथ्वीकाय की जयणा
मिट्टी, पत्थर, खनिज, धातुयें, रत्न इ. पृथ्वीकाय के शरीर हैं| गम- नागमन से, वाहन-व्यवहार से, अन्य शस्त्र संस्कार इत्यादि से पृथ्वीकाय अचित्त बनते हैं| जीवन व्यवहार में निरर्थक सचित्त पृथ्वीकाय की विराधना (हिंसा) न हो जाये उसकी सावधानी रखनी चाहिए| Continue reading “पृथ्वीकाय की जयणा” »

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