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साधु-संतों का विनय करो

साधु संतों का विनय करो

नमो लोए सव्वसाहूणं
साधु-संतों को देखते ही हाथ जोड़कर नमस्कार करो| उनकी त्याग वैराग्यमयी पवित्र वाणी सुनो| Continue reading “साधु-संतों का विनय करो” »

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ज़िन्दगी – परिवर्तन का नाम है

ज़िन्दगी   परिवर्तन का नाम है

संसारे सञ्चलत्येव सुखदुःखैकसन्ततिः
जीवन एक ऐसा प्रवाह है जिसकी धारा सदा एक रूप से नहीं बहती| जीवन में उतार-चढ़ाव, धूप-छॉंव, सुख-दुःख, लाभ-हानि, अच्छा-बुरा आदि होता रहता है| यह ज़िन्दगी सुख-दुःख के मिश्रण से ज्यादा कुछ भी नहीं है| Continue reading “ज़िन्दगी – परिवर्तन का नाम है” »

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Social service is true celebration

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अखरोट का पौधा

अखरोट का पौधा

परोपकारः पुण्याय
फारस में एक बादशाह बड़ा ही न्याय प्रिय था| वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था| प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी| एक दिन बादशाह जंगल में शिकार खेलने जा रहा था, रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है| Continue reading “अखरोट का पौधा” »

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शाश्‍वतसुख के स्वामी

शाश्‍वतसुख के स्वामी
हे विश्‍वेश्‍वर!
हे परमात्मा !
हे देवाधिदेव !
हे त्रिलोकनाथ !
हे विश्‍वकल्याणकर्ता विश्‍वोद्धारक! Continue reading “शाश्‍वतसुख के स्वामी” »

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उर्जा बचाओ…देश बचाओ…

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जैन साधु के विशिष्ट नियम

जैन साधु के विशिष्ट नियम

१) भयंकर गर्मी की ऋतु में प्यास लगने पर भी रात्रि में पानी नहीं पीते|

२) वे काष्ट, लकड़ी, मिट्टी के पात्र ही उपयोग में लेते हैं| स्टील या अन्य धातु के बर्तन काम में नहीं लेते|

३) वे चार महीने तक, वर्षावास में एक स्थान पर स्थिर रहते हैं और शेष समय जिनाज्ञा अनुसार परिभ्रमण करते हैं| Continue reading “जैन साधु के विशिष्ट नियम” »

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Serve your parents

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मुक्त मन से दो

मुक्त मन से दो

परोपकाराय सतां विभूतयः
जो तुम्हारे पास है उसे दूसरों को देने में तु स्वतंत्र हो अतः जब देने का अवसर हो तो मुक्त मन से देना सीखो| यह चिन्तन मेरे मन में सदा रहे कि मेरे पास जो कुछ है वह मैं दूसरों को पहुँचाऊँ…..प्रकृति ने हमें देने के लिए समय, समझ, सामग्री और सामर्थ्य दिया है उसे दूसरो के हित में लगा देना चाहिए|

इसके लिए हम इतने पुण्यशाली बनें कि जो मेरे पास है वह मैं दूसरों को उदारता से दूँ| सृष्टि का एक नियम है जो दिया जाता है वही लौटता है जो हम दे सकते हैं उसे ईानदारी से देते रहना चाहिए|

जीवन में जिसने बॉंटा उसी ने पाया और जिसने संभाला उसी ने गँवाया अतः जब देना ही है तो शत्रु हो या मित्र सभी को समान रूप से दो| कितना भी दे दोगे तो भी खजाने में कुछ कमी नहीं आएगी|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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शीशा

शीशा

ईश्‍वर ने हमें केवल एक चेहरा दिया है और दूसरा हम स्वयं बना लेते हैं

नीना बड़ी गुस्सैल और बदमिजाज लड़की थी| अक्सर नीना की मॉं उसे ऐसी आदतों से छुटकारा पाने के लिए समझाती; पर नीना थी कि उस पर किसी बात का असर ही नहीं होता था| Continue reading “शीशा” »

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