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लोभ और चंचलता

लोभ और चंचलता

लद्धो लोलो भणेज्ज अलियं

लोभी और चञ्चल व्यक्ति झूठ बोला करता है

जो वस्तु जैसी है, उसे वैसी न कहना अयथार्थ वचन है – झूठी बात है| झूठ कौन बोलता है ? इस प्रश्‍न का उत्तर देते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति लोभी होता है, वह अपनी तृष्णा तो तृप्त करने के लिए झूठ बोलता है| तृष्णा कभी तृप्त नहीं होती – यह एक वास्तविकता है; परन्तु लोभी इस वास्तविकता से अनभिज्ञ बना रह कर जीवनभर तृष्णा-तृप्ति का प्रयास करता ही रहता है| इस प्रयास में उसे कभी सफलता नहीं मिलती; फिर भी वह निरन्तर इसके लिए दौड़धूप करता ही रहता है और कदम कदम पर झूठ बोलने को तैयार रहता है|

इसके अतिरिक्त चंचल व्यक्ति भी झूठ बोलता है – ऐसा कहा गया है| ऐसे व्यक्ति के विचार स्थिर नहीं रहते – भावना में बहकर वह कभी एक संकल्प करता है तो कभी दूसरा; परन्तु चंचलता के कारण वह किसी भी संकल्प को पूर्ण नहीं कर पाता| इस प्रकार उसके किये हुए सारे संकल्प झूठे हो जाते हैं|

जो व्यक्ति सच बोलना चाहता है – भगवान की उपासना करना चाहता है, उसे लोभ और चंचलता का त्याग करना पड़ेगा; अन्यथा उससे सफलता दूर रहेगी|

- प्रश्‍नव्याकरण 2/2

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