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झूठ बोलने लगता है

झूठ बोलने लगता है

लोभपत्ते लोभी समावइज्जा मोसं वयणाए

लोभ का प्रसंग आने पर लोभी झूठ बोलने लगता है

झूठ बोलने के अनेक कारण हैं – क्रोध, मान, माया आदि; परन्तु लोभ सबसे बड़ा कारण है| जो लोभी व्यक्ति है, वह साधारण – से लाभ के लिए भी बात-बात पर झूठ बोलने को तैयार हो जाता है|

कुछ लोग तो रिश्‍वत लेकर झूठी गवाही देने का धन्धा ही करते हैं| इन्हें पैसा परमेश्‍वर से भी अधिक प्यारा होता है| तभी तो वे पैसे के लिए परमेश्‍वर की सौगन्ध खाने, गीता या गंगाजल उठाने को तैयार हो जाते हैं|

लोभी व्यक्ति पर कभी विश्‍वास नहीं किया जा सकता| विश्‍वास तो सच्चे व्यक्ति पर ही किया जाता है| लोभी व्यक्ति तभी तक सच्चा रहता है, जब तक उसके सामने कोई प्रलोभन न हो| प्रलोभन सामने आते ही उसका मन पिघल जाता है – देव, गुरु, शास्त्र और तीर्थस्थल के प्रति रहनेवाली उसकी श्रद्धा समाप्त हो जाती है| वह इन सब की शपथ खाकर झूठ बोलने लगता है|

- आचारांग सूत्र 2/3/15/2

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