post icon

सब कुछ तुम्हारी पात्रता पर निर्भर है

सब कुछ तुम्हारी पात्रता पर निर्भर है
अगर तुम्हारा पात्र भीतर से बिलकुल शुद्ध है, निर्मल है, निर्दोष है, तो जहर भी तुम्हारे पात्र में जाकर निर्मल और निर्दोष हो जाएगा| और अगर तुम्हारा पात्र गंदा है, कीड़े-मकोड़ों से भरा है और हजारों साल और हजारों जिंदगी की गंदगी इकट्ठी है-तो अमृत भी डालोगे तो जहर हो जाएगा| सब कुछ तुम्हारी पात्रता पर निर्भर है| अंततः निर्णायक यह बात नहीं है कि जहर है या अमृत, अंततः निर्णायक बात यही है कि तुम्हारे भीतर स्थिति कैसी है| तुम्हारे भीतर जो है, वही अंततः निर्णायक होता है…………

तु जैसा जगत को स्वीकार कर लोगे, वैसा ही हो जाता है| यह जगत तुम्हारी स्वीकृति से निर्मित है| यह जगत तुम्हारी दृष्टि का फैलाव है| तु जैसे हो, करीब-करीब यह जगत तुम्हारे लिए वैसा ही हो जाता है| तु अगर प्रेपूर्ण हो तो प्रे की प्रतिध्वनि उठती है| और तुने अगर परमात्मा को सर्वांग मन से स्वीकार कर लिया है, सर्वांगीण रूप से-तो फिर इस जगत में कोई हानि तुम्हारे लिए नहीं है|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
Did you like it? Share the knowledge:


Advertisement

1 Comment

Leave a comment
  1. Dilip Parekh
    जनवरी 12, 2017 #

    पात्र यानि मन और बुद्धि.
    मन-बुद्धिकी शुद्धि होनेसे पात्रता आती है. //ॐ//

Leave a Reply

Connect with Facebook

OR