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बुरी संगत

बुरी संगत
पवन के पिता जी बड़े परेशान थे| कुछ दिनों से पवन बुरी संगत में पड़ गया था| अंत में उन्हें एक युक्ति सूझी| वे बाजार से कुछ आम खरीद कर लाए| सब आम तो पके हुए और बढ़िया थे, पर एक आम काफी सड़ा हुआ था| उन्होंने अच्छे आमों को एक बड़ी प्लेट में चारों ओर रखकर सड़ा हुआ आम उनके बीच में रख दिया|

अगले दिन जब पवन ने आम खाने के लिए खुशी-खुशी अलमारी में से प्लेट निकाली तो यह देखकर उसकी हैरानी का ठिकाना न रहा कि सभी आम सड़ गए हैं और उनमें से बदबू उठ रही है| पवन के पिताजी तो इसी मौके की तलाश में थे| उसे दुःखी देखकर बोले, ‘‘बेटा! इसी तरह एक दिन तु भी अपने बुरे मित्रों के बीच रहकर भ्रष्ट हो जाओगे| तब तुम्हारी छाया से भी लोग दूर भागेंगे|’’

पवन पर इस घटना का इतना प्रभाव पड़ा कि उसने उसी समय से अपने बुरे मित्रों का साथ छोड़ दिया|

बुरी संगत आदमी को बुरा बना देती है|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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