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फफूंदी/फूलन/फूग की रक्षा करो

फफूंदी/फूलन/फूग की रक्षा करो
1. खाद्य पदार्थों को चुस्त (टाईट) ढक्कन वाले साधन में बंद करके रखिए|

2. फुग उत्पन्न हो ऐसे पदार्थो को नमी के वातावरण में मत रखिए| डिब्बे में से कोई वस्तु लेते समय हाथ जरा भी गीले न हों, इसका ध्यान रखिए|

3. (चार्तुास) बारिश में वड़ी-पापड़ आदि का शक्यतः त्याग कीजिए| अगर त्याग शक्य न हो तो ताजी बनाई हुई वड़ी-पापड़ आदि का उपयोग कीजिए|

4. मिठाई आदि का उपयोग करने से पहले बराबर देख लें कि कहीं उस पर फुग तो नहीं हैं न? लड्डु आदि को तोड़कर निरीक्षण कर लें|

5. जिस चीज पर फुग जमी हो, उसे अलग ही रखें तथा उसे कोई स्पर्श न करें इसका ध्यान रखें|

6. जिन खाद्य पदार्थों पर फुग जम गयी हो वे अभक्ष्य बन जाते हैं| उन्हें न खुद खायें, न दुसरों को खिलायें|

7. बाजार से तैयार बड़ी-पापड़, सूखाई हुई गुवार-फली, सुखाये हुए तलने के अलग-अलग रंग में व आकार में उपलब्ध पदार्थ, मिठाई आदि न खाएँ|

8. छुंदा मुरब्बा आदि को धूप में सुखाने से या चूल्हे पर चढाकर चासणी बनाते समय चासणी कच्ची रहने से फुग हो जाती है|

9. गरम गरम मिठाई, नमकीन, खाखरे आदि डिब्बे में रख देने से फुग उत्पन्न हो सकती है|

10. बुंदी, जलेबी, इमरती आदि में चासणी यदि कच्ची रह गयी हो तो भी फुग हो जाती है|

11. मीठे आंवले, आयुर्वेदिक दवा की गोलियॉं, स्ट्रीप में से निकालकर रखी गयी दवाई की गोलियों वगैरह में फुग होने की संभावना है|

12. बाहर से आने के बाद पसीने से गीले कपडों को समेटे नहीं, पसीना सूखने दें|

13. फफूंदी का भेज वाली गीली हवा से सीधा सम्बन्ध है| इसके रजकण हवा में होते हैं, उन्हे गीला अनुकूल वातावरण मिल जाने पर तेजी से उत्पत्ति होती है| फफूंदी ज़हरीली भी होती है| कभी लकड़े या दुसरी किसी वस्तु पर भी फफूंदी जम जाती है| जब तक प्राकृतिक वातावरण बनकर फफूंदी निर्जीव नहीं बन जाती तब तक उस वस्तु का उपयोग नहीं करें|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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