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पृथ्वीकाय की जयणा

पृथ्वीकाय की जयणा
मिट्टी, पत्थर, खनिज, धातुयें, रत्न इ. पृथ्वीकाय के शरीर हैं| गम- नागमन से, वाहन-व्यवहार से, अन्य शस्त्र संस्कार इत्यादि से पृथ्वीकाय अचित्त बनते हैं| जीवन व्यवहार में निरर्थक सचित्त पृथ्वीकाय की विराधना (हिंसा) न हो जाये उसकी सावधानी रखनी चाहिए|

1. नमक, खार (पापडखार, सोडा इ.) सचित्त क्षार हैं| कुंभार की या मिठाईवाले की भठ्ठी में पकाया हुआ नमक अचित्त बनता है और दीर्घकाल तक अचित्त रहता है| घर में कढ़ाई या तवेपर व्यवस्थित रीति से पूरा लाल होने तक सेंका हुआ नमक अचित्त बनता है, वह ७ दिनों तक अचित्त रहता है| १ कटोरी नमक २ कटोरी पानी डालकर पुनः नमक बनने तक उबालने से ६ मास तक अचित रहता है|

2. चूल्हे पर चड़ते हुए दाल-सब्जी में डाला हुआ नमक अचित हो जाता है, लेकिन अचार में, मसाले में, मुखवास में, या औषधादि में अगर चूल्हे पर संस्कार होनेवाला न हो तो अचित्त नमक का ही उपयोग करें|

3. श्रावक किसी भी खाद्य पदार्थ में भोजन करते समय उपर से (कच्चा) नमक न डालें| एकासना, बियासना, आयंबिल में सचित त्याग रहता है| अतः कच्चा नमक न वापरें|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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