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परमात्मा का उपकार न भूलो

परमात्मा का उपकार न भूलो

निर्मुक्तसफनिकरं परमात्मतत्त्वम्
तु जो सुख सुविधा भोगते हो वह इन परमात्मा की कृपा का ही फल समझना| परमात्मा ने हमें पुण्य का मार्ग बताया उससे हमने शुभ कर्म कर पुण्य का उपार्जन किया| शुभ कर्म के उदय से उत्तम मानव-जन्म, उत्तम कुल, पांच इन्द्रियां, विचारक मन, माता-पिता, घर, पैसा, आरोग्य, वस्त्र, भोजन के अतिरिक्त तारक देव-गुरु का योग आदि मिले|

अतः यह सब उपकार परमात्मा का ही मानना चाहिये न? अतः इन परमात्मा के अगणित उपकारों के कारण भी तु प्रतिदिन मन्दिर में जाकर परमात्मा की मूर्ति के दर्शन-पूजन करो| परमात्मा की मूर्ति को देखकर सत्कार्य करने की प्रेरणा लो| परमात्मा कितने पवित्र हैं और मैं कैसा दुर्गुणों से अपवित्र हूँ ऐसा विचार करना|

हे प्रभो ! मैं आप जैसा शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, निरंजन, निराकार कब बनूंगा ? ऐसी प्रार्थना प्रतिदिन करना| उत्तम सुगंधित पुष्पों से, चन्दन से, धूप से प्रतिदिन परमात्मा का पूजन करना| सारे विश्‍व का कल्याण करने वाले भगवान में पूर्ण श्रद्धा रखना| प्रतिदिन भगवान के साथ का जाप करना और उनके बताये मार्ग पर चलने की भावना रखना| जो सर्वथा दोषमुक्त हो, वह परमात्मा है|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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