post icon

क्युं न हो सुनाइ स्वामी

Listen to क्युं न हो सुनाइ स्वामी

श्री सुपार्श्वनाथ जिन स्तवन

क्युं न हो सुनाइ स्वामी, ऐसा क्या गुन्हा किया रे.
औरोकी सुनाइ जावे, मेरी बारी नाहीं आवे;
तुम बिन कौन मेरा, मुजे क्युं भूला दिया रे.

…क्युं.१

भक्त जनों तार दीया, तारने का काम किया;
बिन भक्तिवाला मोंपे, पक्षपात क्युं कीया रे.

….क्युं.२

राय रंक एक जानो, मेरा तेरा नाहीं मानो;
तरन तारन ऐसा, बिरूद क्युं धार लिया.

…क्युं.३

गुन्हा मेरा बक्ष दीजे, मोंपे अति रहेम कीजे;
पक्का ही भरोंसा तेरा, दिलो में जमा लिया.

…क्युं.४

तुंही एक अंतरजामी, सुनो श्री सुपास स्वामी;
अब तो आशा पूरो मेरी, कहेना सो तो कह दिया.

…क्युं.५

शहेर अंबाला भेटी, प्रभुजी का मुख देखी;
मनुष्य-जनम का ल्हावा, लेना था सो ले लीया.

…क्युं.६

उन्निसो छासठ छबीला, दीपमाला दिन रंगीला;
कहे वीरविजय प्रभु, भक्ति में जमा दीया.

…क्युं.७

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
Did you like it? Share the knowledge:


Advertisement

No comments yet.

Leave a comment

Leave a Reply

Connect with Facebook

OR