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अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

Listen to अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

श्री अनंतनाथ जिन स्तवन
राग : कल्याणअरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा
अनंत जिणंदा गुणगण कंदा

…अरज. १

मोह सदनका वास निवारो,
प्यारी लगी है मोहे मुक्तिकी छाया.
कदन मदन का झगडा टारो;
बूरी लगी है करमकी माया

…अरज. २

चित्त हरामीको करदो विरामी;
चरण शरण दिल मुझको है भाया.
नामी तुं स्वामी चित्तमें बिराजे;
कर्म भुजंगके भयको भगाया

…अरज. ३

तोरे चरणकमलकी सेवा;
अनुपम मेवा मुक्ति मिलाया.
मिथ्या हरके समकित धरके;
कर्म दिवाले अब है हीलाया

…अरज. ४

ममता तोडी समता जोडी;
आत्म कमल रहे नित्य खिलाया.
लब्धिसूरिकी हरदो भीति;
अमृत पाकर मानुं जिलाया

…अरज. ५

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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2 Comments

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  1. Nitesh
    जून 25, 2012 #

    Very nice ! Its so pleasant and soothing to hear this :) It very well composed and sung.

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