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प्राणी सब चेतो

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राग : माढ. मेरे गमका तराना
भाव : परनारी त्याग ने पापत्यागनी प्रेरणा

प्राणी सब चेतो, बात लो ए तो,
दिल विषे उतार;
तुम आतम तारी, सुख करनारी,
बात हमारी दिल विषे उतार.
पाप न करना, दु:खसे डरना,
हरना विषय कषाय;
परनारीको मात समजकर,
उससे लो दिल हटाय रे.

…प्राणी.१

तीर्थंकर प्रभुजी कहे रे,
परनारी परिहार;
जो नहि करते, वो दु:ख भरते,
मर कर नरक मोझार रे.

….प्राणी.२

सर्व थकी जो छोड शको तो,
अपनी भी छोडो नार;
आतमगुणमें मस्त बनोजी,
वोही करे भवपार रे.

….प्राणी.३

त्याग चोरी सत्य बोलनाजी,
न हणो प्राणी जात;
किसीसे मम भाव न राखो,
तब बनोगे अजात रे.

….प्राणी.४

पापी पापको भोगवेजी,
ब्यासी भेदे प्रसिद्ध;
हर्षी हर्षी, हा हा पापको स्पर्शी,
ये दु:ख स्वीकारी लीध रे.

….प्राणी.५

पापतत्त्व जाणी जीया चेतो,
न करो इसका संग;
आत्म कमल ज्युं विकसित होवे,
मिले लब्धि अभंग रे.

….प्राणी.६

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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