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नाथ कहे तुं सुणने नारी

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भाव : नारी ने नारायणी बनावती हितशिक्षा

नाथ कहे तुं सुणने नारी, शिखामण छे सारी जी;
वचन ते सघळां वीणी लेशे, तेहना कारज सरशे, शाणी थइए ज.

…1

जात्रा जागरण ने विवाहमां, माता साथे रहीए जी;
सासरियामां जळ भरवाने, सासु साथे जइए

…शा 02

दिशा अंधारी ने एकलडां, मार्गमां नवि जइए जी;
एकली जाणी आळ चढावे, एवुं शाने करीए

…शा 03

व्हाणामां व्हे लेरा उठी, घरनो धंधो करीए जी;
नणंद जेठाणी पासे जइने, सुख दु:ख वात न करीए

…शा 04

चोकमां चतुराइए रहीए, रांधता नवि रमीए जी;
सहुको ने प्रसाद करावी, पाछळ पोते जमीये

…शा 05

गांठे पहेरी घरमां रहीए, बहार पग नवि भरीए जी;
ससरा-जेठनी लाज करीने, म्हों आगळथी खसीए

…शा 06

छूटे केशे शिर उघाडे, आंगणामां नवि जइए जी;
पुरुष तणो पडछायो देखी, म्हों आगळ नवि रहीए

…शा 07

एकांते दियरीया साथे, हाथे न ताळी लइए जी;
प्रेम तणी जो वात करे तो, म्हों आगळथी खसीये

…शा 08

आभरण पहेरी अंग शोभावी, हाथे दर्पण न लइए जी;
पियुडो जो परदेश सिधावे तो, काजळ रेख न दइए

…शा09

पियुडा साथे क्रोध न करीए, रिसायेला नवि रहीये जी;
छैयां-छोरू-छोकरडांने, ताडन कदीय न करीये

…शा 10

उज्जड मंदिरमांहि क्यारे, एकलडां नवि जइए जी;
एकली जाणी आळ चढावे, एवुं शाने सहीए

…शा 11

ङ्गिरियल नारीनो संग न करीए, तस संगे नव ङ्गरीये जी;
मारग जोतां विचार करीने, ऊंडो पाव न धरीये

…शा 12

उदयरत्न वाचक एम बोले, जे नरनारी भणशे जी;
तेहना पातक दूरे टळशे, मुतक्तपुरीमां जइ मळशे

…शा 13

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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